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जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए : सुल्तान सिंह घोसवाल

Written By Shailendra on Friday, July 5, 2013 | 6:55 PM

रेवाड़ी 5 जुलाई : शुद्ध पर्यावरण का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। इसलिए हमें अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए ताकि दिन-प्रतिदिन बढते हुए प्रदूषण से पर्यावरण की सुरक्षा की जा सके।
यह बात अतिरिक्त उपायुक्त सुल्तान सिंह घोसवाल ने शुक्रवार को गावं डूंगरवास में त्रिवेणी का पौधा लगाने उपरांत कही। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने पर्यावरण प्रदूषण सबसे विकट समस्या है तथा इस समस्या से निपटने और पर्यावरण को हरा भरा व प्रदूषण रहित बनाने के लिए प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए ताकि पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि बेहतर और सुविधाजनक जीवन जीने की इच्छा ने हमें स्वार्थी बना दिया है तथा अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए हम प्राकृति से खिलवाड़ कर ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं को निमंत्रण दे रहे हैं। 
श्री घोसवाल ने कहा कि बढ़ता हुआ प्रदूषण न केवल मानव के लिए अपितु समस्त जीव जगत के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। आज का युग पर्यावरणीय चेतना का युग है। यदि हम यह कहें कि पर्यावरण संरक्षण के लिए विश्वव्यापी सहयोग की आवश्यकता है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने त्रिवेणी का पौधारोपण करने उपरांत इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि त्रिवेणी से जहां एक और पर्यावरण स्वच्छ होता है वहीं दूसरी ओर इसकी पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस अवसर पर जिला वन अधिकारी विरेन्द्र गिल, जिला शिक्षाधिकारी वीरेन्द्र सिंह, जिला मौलिक शिक्षाधिकारी संगीता यादव, सरपंच नवल सिंह, रोहताश भाटोटिया, शिव डूंगरवास, लख्मीचंद, हैड मास्टर कंवर सिंह सहित गांव के अन्य लोग उपस्थित थे।

पानी की एक-एक बूंद को बचाना है :सी.जी. रजनी कांथन

रेवाड़ी 4 जुलाई : उपायुक्त सी.जी. रजनी कांथन ने कहा कि शुद्ध पर्यावरण व जल का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। इसलिए हमें पानी की एक-एक बूंद को बचाना चाहिए और अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए ताकि समय के साथ-साथ पर्यावरण व जल दोनों का संरक्षण किया जा सके।

श्री कांथन वीरवार को जिला सचिवालय सभागार में जल एवं पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बैठक में संबंधित अधिकारियों से जल एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न बिन्दुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की तथा उनसे सुझाव भी मांगे। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण करना जल के उत्पादन करने के समान है तथा हमें अपने जीवन में 'जल है तो कल हैÓ के सिद्धांत को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें चाहिए कि हम सरकार द्वारा लागू की गई जल संग्रहण योजना को कामयाब बनाने में अपना हर संभव सहयोग करें।

उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि कई जगह वाटर लेवल दिन प्रतिदिन नीचे जा रहा है, जिसे रोकने के लिए हमें अभी से ही सोचना होगा अन्यथा आने वाले समय में परिणाम और भी घातक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम वर्षा के जल को संचित करके भी जल संरक्षण में अपना सहयोग दे सकते हैं। उन्होंने जिला शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए कि वे स्कूली बच्चों को जल एवं पर्यावरण संरक्षण बारे जागरूक करें तथा स्कूलों में जल संरक्षण की व्यवस्था लागू करें।
उपायुक्त ने कहा कि आज हमारे सामने पर्यावरण प्रदूषण सबसे विकट समस्या है तथा इस समस्या से निपटने और पर्यावरण को हरा भरा व प्रदूषण रहित बनाने के लिए प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए ताकि पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि बेहतर और सुविधाजनक जीवन जीने की इच्छा ने हमें स्वार्थी बना दिया है तथा अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए हम प्राकृति से खिलवाड़ कर ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं को निमंत्रण दे रहे हैं। 
उन्होंने कहा कि बढ़ता हुआ प्रदूषण न केवल मानव के लिए अपितु समस्त जीव जगत के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। आज का युग पर्यावरणीय चेतना का युग है। यदि हम यह कहें कि पर्यावरण संरक्षण के लिए विश्वव्यापी सहयोग की आवश्यकता है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी । उन्होंने कहा कि हमें इस अभियान को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जहां भी पौधे लगाने लायक जगह है उसे चिन्हित कर वहां पौधारोपण करें ताकि वन क्षेत्र को बढाकर पर्यावरण संरक्षण को मजबूत किया जा सके। 
जिला वन अधिकारी विरेन्द्र गिल ने बताया कि घटते वन क्षेत्र को देखते हुए जिले में स्टेडियम, आईटीआई, पंचायत भूमि व स्कूलों में 800 एकड भूमि पौधे लगाने के लिए चिन्हित की गई है। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त सुल्तान सिंह घोसवाल, जिला शिक्षाधिकारी, दशरथ सिंह चौहान, एलएन शर्मा, आनंद कुमार, पीके शर्मा व विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने बैठक में अपने-अपने सुझाव रखे।
बैठक में एयूसीटी अमना तस्मीन, उपमंडल अधिकारी (ना0) अमरदीप जैन, डीएसपी विरेन्द्र कुमार, डिप्टी सीईओ जिला परिषद अमरचंद कौशिक, पार्षद कुमारी गीता, विभिन्न विभागों के अधिकारीगण व अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।

उत्तराखंड आपदा राहत कोष में अब तक कुल 24 लाख

रेवाड़ी 4 जुलाई ( ) उत्तराखंड में विनाशकारी बाढ व भूस्खलन के कारण भारी मुसीबत व मुश्किलों का सामना कर रहे व्यक्तियों की मदद के लिए जिला प्रशासन द्वारा स्थापित किए गए उत्तराखंड आपदा राहत कोष में अब तक कुल 24 लाख 50 हजार 375 रुपए जमा हो चुके हैं।
उपायुक्त सी.जी. रजनी कांथन ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि वीरवार को हरियाणा जनहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक लाख 32 हजार रुपए, चैयरमेन पंचायत समिति बावल इंद्रा छाबडी व चैयरमेन पंचायत समिति रेवाडी ने 42 हजार रुपए, चैयरमेन पंचायत समिति नाहड श्याम यादव ने 21 हजार रुपए, कार्यकारी अभियंता काडा ने 20 हजार 415 रुपए, हैड मास्टर राजकीय हाई स्कूल भोतवास अहीर ने 13 हजार 878 रुपए, जिला सैनिक बोर्ड स्टाफ रेवाडी ने 11 हजार 990 रुपए, जिला कन्फेड कार्यालय रेवाडी ने 61 सौ रुपए आपदा राहत कोष हेतु दान दिए।
उपायुक्त सी.जी.रजनी कांथन ने रेवाडी जिले के अन्य लोगों से भी उत्तराखंड आपदा राहत कोष में उदारतापूर्वक दान देने की अपील करते हुए कहा कि वे उत्तराखंड में आई आपदा से प्रभावित व्यक्तियों को संकट की इस घडी से उबारने में अपनी सक्रिया भूमिका निभाएं। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि जिस प्रकार बूंद-बूंद से घडा भरता है, उसी प्रकार आप लोगों के थोडे-थोडे सहयोग व योगदान से उत्तराखंड तबाही के पीडितों के जख्मों पर मरहम लगाकर उन्हें फिर से बसाया जा सकता है।

खण्डर में तब्दील राज सिनेमा हाल

Written By Shailendra on Wednesday, May 22, 2013 | 1:26 AM

रेवाड़ी: राज सिनेमा हाल, जहां कभी ९० के दशक में दर्शकों को लाईन में लगकर टिकट लेकर फिल्म देखना पड़ती थी वहीं आज यही राज सिनेमा अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। खण्डहर में तब्दील राज सिनेमा के मालिकों ने कभी इसके रख रखाव पर ध्यान नहीं दिया।  वह मात्र  इस हाल के चलाने वाले ठेकेदारों से किराया लेने ही आते हैं, उन्होंने  इस हाल की मरम्मत कराने और  ना  ही इस हाल को चलाने में रुचि दिखाई। राज सिनेमा हाल पहले ही एक विशेष  विषय में रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिए विख्यात है। इस हाल में परिवारिक व्यक्ति तो फिल्म देखने नहीं आते लेकिन दर्शकों का एक विशेष वर्ग  अपनी जान जोखिम में डाल कर इस हाल में फिल्म देखने आते है। इस हाल में आधे से अधिक कुर्सियां टूटी हुई हैं और छत से अक्सर मलबा गिरता रहता है, मलबा गिरने से  किसी भी वक्त दर्शकों के साथ गंभीर हादसा हो सकता है। सुविधा के नाम पर ना तो सिनेमा हाल में शौचालय है और ना ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था है। हाल के अंदर छत अनेक स्थानों से झड़ रही है। इस तरफ ना तो कभी प्रशासन ने, ना इस हाल को चला रहे ठेकेश्दारों ने, और न हाल के मालिकों ने इसे गंभीरता से लिया। यदि यह सिनेमा हाल इसी तरह चलता रहा तो एक न एक दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है। हाल के मालिकों को केवल मुनाफे से और प्रशासन को टैक्स मिलने से  ही मतलब है, उन्हें दर्शकों की जान जाने की कोई परवाह नहीं है। इस हाल को चला रहे प्रबंधक के कमरे की हालत भी खराब है और प्रबंधक के बैठने वाली जगह के ठीक उपर छत का मलबा अक्सर गिरता रहता है। एक बार तो काफी भारी मात्रा मेें मलबा गिरा लेकिन संयोगवश उस वक्त प्रबंधक अपनी सीट पर नहीं थे। प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिये अन्यथा कोई बड़ा हादसा उपहार कांड की याद दिला सकता है, जिसमें सैंकड़ों दर्शकों की जान गई थी। जब इस संदर्भ में हमारे संवाददाता ने प्रबंधक से पूछा कि इस समस्या का समाधान क्यों नहीं करते तो उन्होंने बताया कि मैंने हाल के मालिकों को इस बारे में बता दिया है,लेकिन अभी तक उन्होंने कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई। अगर निकट भविष्य में कोई हादसा होता है तो उसके जिम्मेवार कौन होगे- दर्शक,हाल के मालिक या फिर प्रशासन.. .. .. सोचने का विषय है।

बजारों में धडल्ले से बिकती नकली मिठाइयां,प्रशासन मौन

Written By Shailendra on Wednesday, May 15, 2013 | 1:25 AM

रेवाड़ी(दीपा भारद्वाज): दशहरा-दीपावली का सीजन शुरू होते ही बाजारों में रगं-बिरगें मिठाइयों के स्टाल सजने लगे है। वहीं मिठाइयों की शुद्वता की जांच करने वाला विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। बाजारों में नकली मिठाइयों की दुकानें धडल्ले से देखी जा सकती हैं वहीं देसी घी के नाम पर भी दौ सौ रूपये से लेकर ढाई सौ रूपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। स्वास्थय विभाग ने इन दुकानों से नजराना वसूल कर उपभोक्ताओं के स्वास्थ के साथ खिलवाडं करने की पुरी अनुमति दे रखी है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग ने अभी तक किसी भी दुकान के नमुने नहीं लिए है। आए दिन समाचारपत्रों में नकली खोआ, घी व मिठाई मिलने की खबरें प्रकाशित हो रही है, उसके बावजूद भी विभाग हरकत में नहीं आया है। बाजारों में बनने वाली अधिकतर मिठाइयां दूध पाउडर व अन्य पदार्थों को मिलाकर तैयार की जा रही है। बर्फी के अलावा रसगुल्ले, गुलाब जामुन और यहां तक की मिठाइयों का राजा पेठा भी्र गले-सड़े पदार्थों से बनाया जा रहा है। बाजारों में जहां अच्छी बर्फी जहां 260 से 280 रूपए तक मिल रही है वहीं बर्फी 150 से शुरू होकर 170 रूयए तक भी उपलब्ध हो रही है इसी तर्ज पर जहां देसी घी पांच सौ से लेकर छ: सौ रूपये प्रतिकिलोग्राम तक मिल रहा है वहीं गलियों की दुकानों में दो सौ से लेकर ढाई सौ रूपये प्रति किलोग्राम तक मिल रहा है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन बर्फीयों व घी आदि में कितनी शुद्धता होगी और यह स्वास्थ पर कितना बुरा प्रभाव डालेगी। स्थानीय मौहल्ला कुतुबपुर में कई गोदामों में धड़ल्ले से नकली मिठाइयां बन रही है और विभाग इसके प्रति पूरे तरीके से आंखें बंद किए हुए है। विभाग की नाकामी के चलते इसका दुश्परिणाम लोगों को अपने स्वास्थ के साथ खिलवाड कर चुकाना पड़ रहा है। इस संबन्ध में जब जिला स्वास्थ विभाग अधिकारी से बात की गई तो उन्होने कहा किसी भी प्रकार की शिकायत हमें प्राप्त नहीं हुई है और जैसे ही कोई शिकायत मिलेगी विभाग हरकत में आ जाएगा। स्वास्थ विभाग की टीम दुकानों पर छापामारी के नाम पर कुछ दुकानों के नमुने बेशक ले रहा हो लेकिन यह सिर्फ नाममात्र का दिखावा ही है।

अतिक्रमण के साए में पंजाबी मार्कीट

Written By Shailendra on Wednesday, May 8, 2013 | 1:23 AM

रेवाड़ी (सुरेन्द्र वशिष्ठ):नगर परिषद द्वारा शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लाख दावे करने के बावजूद शहर की सबसे व्यस्ततम पंजाबी मार्कीट में अतिक्रमण चरम सीमा पर है, जिसके कारण इस मार्कीट से अब दुपहिया वाहन तो क्या, पैदल राहगीरों का निकलना भी दुश्वार हो गया है और प्रतिस्पर्धा की आड़ में दुकानदारों की नप प्रशासन से कथित मिलीभगत के चलते इस मार्कीट का स्वरूप ही बदलकर रह गया है। ऐसे में दिनभर मार्कीट में जाम लगा होने के कारण लोगों को या तो घंटों फंसे रहना पड़ता है या फिर उन्हें अपना मार्ग बदलना पड़ता है। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों का आरोप है कि नप प्रशासन अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर शहर के अन्य हिस्सों में कभी-कभार जरूर कार्रवाई करके अपने कत्र्तव्य की इतिश्री समझ लेता है, लेकिन करीब 35 वर्षों से चली आ रही इस मार्कीट में शायद ही आज तक नगर परिषद द्वारा अतिक्रमण संबंधी कोई कार्रवाई अमल में लाई गई हो।
सिमटकर रह गया रोड:बताया जाता है कि वर्षों पूर्व जब यह मार्कीट स्थापित हुई थी, उस समय इस मार्कीट में 18 फुट का रोड था, लेकिन वर्तमान में यह रोड मात्र 3-4 फुट सिमटकर रह गया है, क्योंकि यहां दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे 10 फुट तक सामान रखकर अतिक्रमण किया हुआ है।

एक-एक फुट के लिए होता है झगड़ा:

इतना भारी अतिक्रमण करने के बावजूद दुकानदारों में एक-एक फुट जगह के लिए आपस में अकसर झगड़ा रहता है और कई बार तो बात इतनी बढ़ जाती है कि मामला पुलिस तक पहुंच जाता है, लेकिन पंजाबी समुदाय से होने के कारण पुलिस भी इनका आपसी समझौता करवाकर मामले को खत्म करवा देती है, क्योंकि इस मार्कीट में कुछ प्रभावशाली दुकानदारों के मंत्री जी से अच्छे संबंध हैं और वे उन्हें जिताने में पूरी भूमिका निभाते हैं।

चोर गिरोह सक्रिय:

अतिक्रमण की समस्या के साथ-साथ इस मार्कीट में इन दिनों चोर गिरोह काफी सक्रिय है, जिसके कारण यहां आने वाले लोगों खासकर महिलाओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। दुकानदारों द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण के कारण रोड इतना संकड़ा हो गया है कि चोर गिरोह के सदस्य आसानी से यहां खरीददारी के लिए आने वाली महिलाओं का का सामन उड़ा ले जाते हैं और उसे लेकर ग्राहक व दुकानदारों में अकसर झगड़ा हो जाता है।

एक माह पहले गर्माया था मामला:

करीब एक माह पूर्व 5-6 युवक कायस्थवाड़ा से गोकल बाजार जाने के लिए इस मार्कीट में अल्टो गाड़ी लेकर आ गए। उन्होंने जब यहां से अपनी गाड़ी निकलनी चाही तो दुकानदारों व उन युवकों में भारी झड़प हो गई और वे काफी गर्मा-गर्मी के बाद यहीं से अपनी गाड़ी निकलकर ले गए। इस बात से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि मार्कीट में कितना भारी अतिक्रमण है और यदि नगर परिषद चाहे तो आसानी से रोड को चौड़ा किया जा सकता है।

नप प्रशासन को है सारी खबर:

हालांकि नगर परिषद को यहां बढ़ रहे अतिक्रमण के बारे में सब कुछ पता है, लेकिन नप अधिकारी चाहकर भी इस मार्कीट में कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि जब भी यहां कोई कार्रवाई करने का प्रयास किया जाता है तो प्रभावशाली दुकानदारों के इशारे पर नप पर दबाव आ जाता है।

क्या कहते हैं मार्कीट प्रधान:

आपसी गुटबाजी के चलते पंजाबी मार्कीट में दो संगठन काम कर रहे हैं, जिनमें एक ओर जहां पंजाबी मार्कीट एसोसिएशन है, वहीं दूसरी ओर पंजाबी मार्कीट ट्रेडर्स। अतिक्रमण की समस्या पर दोनों संगठनों के अलग-अलग विचार हैं। इनमें एसोसिएशन के साथ जहां करीब 135 दुकानदार हैं, वहीं 45 दुकानदार ट्रेडर्स के साथ हैं। ट्रेडर्स के प्रधान महेश खुराना का कहना है कि दीवाली का सीजन होने के कारण कुछ लोगों ने अपनी दुकानों के आगे सामान रखा हुआ है और इसे लेकर उन्होंने दुकानदारों को अपना सामान हटाने संबंधी निर्देश भी दे दिए हैं। वहीं दूसरी ओर एसोसिएशन के प्रधान एमएम सपड़ा कहते हैं कि उनकी मार्कीट में ऐसी कोई समस्या नहीं है।

मंत्री के समक्ष रखी थी समस्या:

यहां गौरतलब है कि कांग्रेस कमेटी के पूर्व जिलाध्यक्ष कोटूराम धमीजा ने गत दिनों पंजाबी समाज द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में बिजली मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव के समक्ष शहर में बढ़ रही अतिक्रमण की समस्या को रखते हुए कहा था कि वे स्वयं शहर के बाजारों का पैदल दौरा कर देखें कि लोगों को आवागमन में कितनी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उसके बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।

क्या कहते हैं नप सचिव:

जब इस संबंध में नप सचिव टीआर शर्मा से बात की गई तो उन्होंने माना कि पंजाबी मार्कीट में भारी अतिक्रमण है। मगर जल्द ही इस संबंध में सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि उन पर कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं होता और न ही किसी तरह का राजनीतिक दबाव स्वीकार करते हैं।

होटलों में तेजी से फल-फूल रहा देह व्यापार

Written By Shailendra on Wednesday, May 1, 2013 | 1:21 AM

रेवाड़ी (संवाददाता):
    पुलिस प्रशासन की कथित मिलीभगत के चलते शहर के होटलों में देह व्यापार तेजी से फल-फूल रहा है। मगर सब कुछ जानते हुए भी पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले में मौन साधे हुए हैं। यहां स्थिति यह है कि शहर के प्रमुख रेलवे रोड, बस स्टैंड, बावल रोड, ब्रास मार्कीट, नाईवाली चौक, बाइपास सहित राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 स्थित विभिन्न होटलों में देह व्यापार का खेल जमकर खेला जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि शहर के होटलों में पिछले काफी समय से अंतर्राज्जीय गिरोह सक्रिय है, जोकि बाहर के राज्यों से युवतियां लाकर यहां होटलों में उन्हें जिस्म फरोसी के लिए परोसते हैं और उनके बदले में होटल व्यवसायियों से मोटी कीमत वसूलते हैं। वहीं होटल व्यवसायी इन युवतियों को ग्राहकों के आगे पेश करके मनमानी राशि वसूलते हैं। बताया जाता है कि यहां अलग-अलग राज्यों की युवतियों के अलग-अलग रेट निर्धारित किए हुए हैं और मात्र एक फोन करते ही पांच मिनट में युवतियां उपलब्ध करवा दी जाती हैं। इसके साथ ही उम्र के हिसाब से भी रेट वसूला जाता है।
कहां से आती हैं युवतियां:
इस समय शहर के होटलों में दिल्ली, गुडग़ांव, पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों से युवतियां मंगवाई जा रही है। इन युवतियों को दलाल एक माह के लिए लेकर आते हैं। इसके बदले वे पीछे एकमुश्त राशि देकर आते हैं और यहां लाकर ग्राहकों से मुंह मांगी रकम वसूलते हैं। जो राशि वे पीछे देकर आते हैं, उससे तीन-चार गुणा राशि ये दलाल इन युवतियों से जिस्म फरोसी का धंधा करवाकर वसूलते हैं।
उम्र के हिसाब से फिक्स हैं रेट:
होटल संचालकों ने जिस्म फरोसी के अलग-अलग रेट निर्धारित किए हुए हैं। एक पूरी रात के लिए जहां एक ग्राहक से 5 से 7 हजार रूपए लिए जाते है, वहीं एक घंटे के लिए 2 से 3 हजार रूपए निर्धारित हैं। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों की युवतियों व महिलाओं के उम्र के हिसाब से रेट फिक्स किए हुए हैं।
मसाज के नाम पर भी चलता है खेल:
शहर के हूडा सैक्टरों में स्थित घरों व दुकानों में कुछ महिलाओं ने कथित मसाज पार्लर खोले हुए हैं। सैक्टर 3 व 4 के अलावा उत्तम नगर जैसी पॉश कॉलोनियों में जहां कोई सहज अंदाजा नहीं लगा सकता, वहां इन मसाज पार्लरों की आड़ में भी जमकर जिस्म फरोसी को अंजाम दिया जा रहा है। इन मसाज पार्लरों में महिलाओं का तो दूर-दूर तक नामों निशान तक नहीं होता। बल्कि यहां जमकर देह व्यापार का खेल खेला जाता है।
एजेंट की भूमिका निभाते हैं होटल व्यवसायी:
शहर के होटल व्यवसायियों का इन दलालों से सीधा संपर्क है। जब भी ग्राहक की डिमांड होती है तो ये होटल व्यवसायी दलालों से संपर्क कर उन्हें युवतियां भेजने का आर्डर करते हैं और आर्डर मिलते ही दलाल निर्धारित समय में युवतियां पहुंचा देते हैं और जो पेमेंट दलाल को मिलती है, उसमें से होटल संचालक का भी हिस्सा तय होता है।
कमरे का दोगुणा किराया वसूलते हैं:
होटल संचालक एेसे ग्राहकों से कमरे के निर्धारित रेट से दोगुणा किराया वसूलते हैं, जिसके बदले में वे ग्राहकों को पुलिस रेड की भी पूरी गारंटी देते हैं। ऐसे ग्राहक होटल में कुछ देर के लिए ठहरते हैं, जिससे होटल संचालकों पर आम के आम और गुठलियों के दाम वाली कहावत चरितार्थ होती है।
कौन होते हैं ग्राहक:
शहर के बडे़-बड़े उद्योगपति व सफेदपोश नेता होटल संचालकों को मुंह मांगी रकम देकर अपनी रातें रंगीन करते हैं। हां ये जरूर है कि ज्यादा बडे़ लोग होटलों में रात न बिताकर इन युवतियों को अपने निजी ठिकानों पर ले जाते हैं। ऐसे कई प्रभावशाली लोगों के मामले पहले भी अनेक बार प्रकाश में आ चुके हैं, लेकिन राजनीतिक प्रभाव दिखाकर एेसे लोग हर बार पुलिस के चंगुल से निकल जाते हैं।
कैसे देते हैं धंधे का अंजाम:
दलाल पीछे एकमुश्त राशि देने के बाद दर्जनों युवतियों को एक गाड़ी में बैठाकर देर रात शहर में लेकर आते हैं। यहां उन्हें किसी घर में ठहरा दिया जाता है। जैसे-जैसे डिमांड आती है। युवतियों को एक युवक बाइक पर बैठाकर पूरी सावधानी के साथ होटल पर छोड़ देता है और होटल संचालक से राशि ले जाता है। आगे की जिम्मेदारी होटल संचालक की होती है। सुबह होते ही युवती को वहीं युवक बाइक पर वापस ले जाता है। ऐसे में दलाल पुलिस की पकड़ से छूट जाता है।
पुलिस की बंधानी फिक्स है
सूत्रों का कहना है कि एेसे होटल संचालक पुलिस से गहरी सांठगांठ करके इस धंधे को अंजाम देते हैं। इसकी एवज में पुलिस को हर माह उनका नजराना पहुंचा दिया जाता है। इसके बाद पुलिस कर्मी इन होटल संचालकों की ओर आंख उठाने तक की जहमत नहीं उठाते और होटल संचालक भी बेखौफ होकर अपना खेल खेलते हैं।
नियमों को रखते हैं ताक पर
होटल संचालक सरकार के सभी नियम ताक पर रखकर चलते हैं। इन होटलों में स्कूली छात्राओं तक के प्रवेश पर कोई मनाही नहीं है। वहीं ऐसे ग्राहकों की एंट्री तक नहीं की जाती। यहां सब कुछ खुल्लम खुल्ला चलता है।
कभी-कभार होती है कार्रवाई
जब से महिला सैल का गठन हुआ है तो महिला एएसआई सुनीता के नेतृत्व में शहर के अधिकांश होटलों पर छापामार कार्रवाई की, जिससे होटल संचालकों के होश उड़ गए। मगर कुछ दिनों बाद ही यह कार्रवाई ठंडी पड़ गई। इससे समझा जा सकता है कि पुलिस व होटल संचालकों में कितनी गहरी सैठ पैठ है।
क्या कहती हैं टॉस्क फोर्स इंचार्ज
जब इस संबंध में टॉस्क फोर्स इंचार्ज एएसआई सुनीता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में नए पुलिस अधीक्षक ने पदभार संभाला है। जैसे ही इस संबंध में उनकी ओर से निर्देश जारी होंगे तो एेसे होटल संचालकों के खिलाफ जरूर सख्त कार्रवाई अमल में लाई
 जाएगी। उन्होंने पहले भी इन होटल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी

अतिक्रमण का पर्याय बना रेलवे रोड

Written By Shailendra on Friday, March 1, 2013 | 1:31 AM

रेवाड़ी (संवाददाता):शहर के सबसे व्यस्ततम रेलवे रोड पर बढ़ता अतिक्रमण जहां सरकार द्वारा करवाए जा रहे विकास कार्यों में कोढ़ का काम कर रहा है, वही जिला प्रशासन द्वारा नगर के सौंदर्यकरण संबंधी दावों की भी पोल खोलता है। रेलवे रोड को देखने मात्र से ऐसा लगता है जैसे मानो इस बढ़ते अतिक्रमण के पीछे दुकानदार कम, बल्कि नगर परिषद ज्यादा दोषी है, क्योंकि इसमें नगर परिषद अधिकारियों की मिली-भगत दिखाई देती है, जिसके चलते आमजन और रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले पैदल यात्रियों का इस मार्ग से गुजरना दुश्वार हो गया है। यहां गौरतलब है कि सडक़ के बीचों-बीच सीवर डाले का कार्य जारों पर है, जिसके चलते सडक़ में जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं और किसी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। वहीं रेलवे रोड की दुर्दशा देखते ही बनती है, क्योंकि इस रोड पर अनेक प्रभावशाली दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे कई-कई फुट तक अतिक्रमण किया हुआ है। लोगों का कहना है कि अनेक दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे रेहड़ी वालों को संरक्षण दिया हुआ है, जिससे सडक़ के दोनों ओर भारी अतिक्रमण होने के कारण रोड् इतना तंग हो गया है कि दुपहिया वाहन तो दूर पैदल यात्री भी इस मार्ग से आसानी से नहीं निकल सकता। ऐसे में अनेक यात्रियों की तो ट्रेन तक छूट जाती है और उन्हें कई घंटे स्टेशन पर ही गुजार कर खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि कभी-कभार नगर परिषद अधिकारी अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर कुछ रेहड़ी वालों के खिलाफ छोटी-मोटी कार्रवाई करके अपने कत्र्तव्य की इतिश्री समझ लेते हैं। मगर इन प्रभावशाली दुकानदारों के खिलाफ कोई भी ठोस कार्रवाई करने में नप अधिकारी भी अपने आपको असहाय महसूस करते हैं, जिसका खामियाजा आमजन और पैदल यात्रियों को भुगतना पड़ता है। यहां स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि रेलवे स्टेशन के मुख्यद्वार के ठीक सामने आटो रिक्शा चालक सवारियां भरने के चक्कर में दिनभर अपने आटो कतार में खड़ा कर देते हैं, जिससे यह मार्ग और भी बुरी तरह अवरूद्ध हो जाता है और सडक़ पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आल इंडिया एंटी क्राईम एसोसिएशन के सुंदर मुद्गिल सहित अनेक जागरूक नागरिकों का कहना है कि इस बारे में नगर परिषद के अधिकारियों को अनेक बार अवगत करवाए जाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। उपायुक्त को चाहिए कि वे स्वयं इस रोड का निरीक्षण कर नप अधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई करने का निर्दश दें।

बाजारों में पटाखों की अवैध बिक्री जोरों पर

Written By Shailendra on Thursday, November 1, 2012 | 1:29 AM

रेवाड़ी (संवाददाता):जिला प्रशासन द्वारा शहर के बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगाए जाने के बावजूद दीपावली का सीजन शुरू होते ही शहर के बाजारों में पटाखा व्यापारी सक्रिय नजर आने लगे हैं। आलम यह है कि बाजारों व रिहायशी क्षेत्रों में पटाखों से ठसाठस भरे गोदामों के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा होने का अंदेशा बना हुआ है, लेकिन प्रशासन की ओर इस दिशा में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पटाखा व्यापारियों ने दीपावली के मद्देनजर जैनपुरी, कायस्थवाड़ा, चौधरीवाड़ा, मुक्तिवाड़ा, वैद्यवाड़ा आदि मोहल्लों में अपने गोदाम बना रखे हैं, जिनमें उनका लाखों का माल भरा हुआ है। इसके साथ ही शहर के सबसे व्यस्ततम सट्टा बाजार, पैठ बाजार, गुड़ बाजारों में भी स्थिति कुछ ऐसी ही दिखाई पड़ रही है, जिसकी प्रशासन को खबर तक नहीं है। वहीं  शहर की बाहरी कालोनियों में भी छोटे दुकानदार पटाखों की बिक्री करने से नहीं चूक रहे हैं। इस बात से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन इस बात से कितना बेखबर  है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पुलिस प्रशासन की इन पटाखा व्यापारियों से कथित मिलीभगत के चलते यह सब चल रहा है। गौरतलब है कि पूर्व में किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए प्रशासन द्वारा शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन इन हालातों को देखकर ऐसा लगता है कि न तो व्यापारियों को प्रशासन का कोई खौफ है और न ही पुलिस प्रशासन को आमजन की सुरक्षा से कोई सरोकार। कुछ अन्य व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन पटाखा व्यापारियों की पुलिस प्रशासन से गहरी सैठ-पैठ है, जिससे वे बेखौफ होकर पटाखों की बिक्री करते हैं। इनमें एक पटाखा व्यापारी तो अपने आपको कप्तान समर्थक होने का दावा करते हुए यहां तक कहने से नहीं चूकते कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जिन मोहल्ला में इन व्यापारियों ने अपने गोदाम बना रखे हैं उनके पड़ौस में रह रहे लोगों का कहना है कि वे चाहकर भी इनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठा पा रहे हैं, क्योंकि जब भी कोई शिकायत करता है तो ये उससे सैंटिंग कर लेते हैं और इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। शहर के जागरूक लोगों ने उपायुक्त से ऐसे व्यापारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की मांग की है
 
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